Description
गोमूत्रादि घन वटी (Gomutradi Ghan Vati)
Gomutradi Ghan Vati
घटक – 500 मिग्रा. गोली में घटकों की मात्रा- गोमूत्रघन 150 मिग्रा., हरड 50 मिग्रा., बहेड़ा 50 मिग्रा., आंवला 50 मिग्रा., कालीजीरी 50 मिग्रा., पुनर्नवा 50 मिग्रा., नागरमोंथा 50 मिग्रा., कुटकी 50 मिग्रा.।
रोग निर्देश – अजीर्ण, अग्निमांद्य, उदावर्त, गुल्म, अर्श, यकृत प्लीहा वृ(, पाण्डु कामला, कृमि, मलावरोध, आम वृ( जन्य विकार, शोथ, मेदवृ( ,श्लीपद आदि विकारों में विशेष उपयोगी।
मात्रा एवं अनुपान- 1-2 गोली सुबह-शाम जल के साथ या चिकित्सक के परामर्शानसार अन्य अनुपान से ।
विशेष- रसतन्त्रसार ;द्वितीय भागद्ध में गौमूत्रादि क्षार का योग दिया गया है। इसी योग में संशोधन करके हमने गौमूत्रादि घन वटी का निर्माण किया है। यह विभिन्न उदर विकारां के लिये रामबाण है। विभिन्न उदर रोगों में जो आयुर्वेद चिकित्सक आरोग्यवर्धिनी वटी, पुनर्नवादि मण्डूर, यकृतहर लौह, लोकनाथ रस आदि शास्त्रोक्त योगों का प्रयोग करते हैं उनके स्थानापन्न गौमूत्रादि घन वटी का प्रयेग कर लाभ उठा सकते हैं इसके कैपसूल भी उपलब्ध है।
पैकिंग – 1 किलो, 500 ग्राम, 100 ग्राम।











































































































































































































































































































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