Description
रास्ना घनसत्व (Rasna Ghansatwa)
Rasna Ghansatwa
घटक – 1 कैपसूल में घटकों की मात्रा- रास्ना घनसत्व 600 मिग्रा.।
रोग निर्देश- आमवात, गृध्रसी, पक्षाघात, सन्धिवात, वातरक्त आदि वात विकारों मे प्रशस्त।
मात्रा एवं अनुपान -विभिन्न वात विकारों में 1-2 कैपसूल या 1-2 ग्राम पाउडर दिन मे ंदो 2-3 बार तक सेवन कराना चाहिये।
विशेष – यदि रास्ना घनसत्व का प्रयोग रास्नादि या एरण्ड क्वाथ के साथ कराया जाय तो विशेष लाभदायक रहता है। वात रोगों में गर्ग द्वारा वातनाशक औषधियों के मिश्रण से निर्मित वातान्तक कैपसूल, वातान्तक वटी का प्रयोग भी लाभदायक है। वातरोगों में बाह्य प्रयोग के लिये गर्ग निर्मित वातनौल तैल या वातनौल मरहम का प्रयोग भी लाभकर है।
पथ्य-अपथ्य : वतावर्धक एवं शीतल आहार-विहार का त्याग कर सुपाच्य आहार का सेवन कराना चाहिये। पैकिंग : 500 कैपसूल, 120 कैपसूल, 60 कैपसूल। पाउडर- 1 किलो, 100 ग्राम
घटक – 1 कैपसूल में घटकों की मात्रा- मुलहठी घनसत्व 600 मिग्रा.।
रोग निर्देशः कास तथा श्वास में उपयोगी घनसत्व है। कास तथा श्वास की उस अवस्था में जब कफ का निष्कासन नहीं होता अव्यर्थ कार्यकारी है।
मात्रा तथा अनुपान : 1-2 कैपसूल या 1 से 2 ग्राम पाउडर गर्म जल के साथ दिन में 2-3 बार तक सेवन कराना चाहिये।
विशेष – यदि मुलहठी घनसत्व के साथ अपामार्ग घनसत्व का भी मिश्रण करके शुष्क कास तथा श्वास में प्रयोग किया जावे तो विशेष लाभ होता है।
पैकिंग : 500 कैपसूल, 120 कैपसूल, 60 कैपसूल। पाउडर- 1 किलो, 100 ग्राम












































































































































































































































































































Reviews
There are no reviews yet.