Charmrogantak Set

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चर्मरोगान्तक सैट (Charmrogantak Se)
Charmrogantak Se
इस सैट 3 औषधियों का मिश्रण है।
चर्मरोगान्तक कैपसूल ;60द्ध – विभिन्न चर्म विकार नाशक कैपसूल।
निम्बादि चूर्ण ;20 ग्रामद्ध – चर्म विकार नाशक चूर्ण।
चर्मनोल मलहम – खाज, खुजली आदि में बाह्य प्रयोग के लिये।
रोग निर्देश एवं प्रयोग विधि – 1-1 कैपसूल सुबह-शाम जल से। चूर्ण 1-1 चम्मच भोजन के बाद जल से। मलहम – बाह्य प्रयोग के लिये। पैकिंग- 1 माह का सैट
1. शक्ति पंचासव –
घटक – 1 लिटर आसव में घटकों की मात्रा- द्राक्षासव 200 मिली., लोहासव 200 मिली., अंगूरासव 200 मिली., अश्वगंधारिष्ट 200 मिली.,
मात्रा एवं प्रयोग विधि – 3-4 चम्मच तक बराबर जल मिलाकर भोजन के बाद।
रोग निर्देश – उपरोक्त पांच आसवअरिष्ट से मिला हुआ यह आसव यकृत की कार्यशीलता को बढ़ाकर रोगी की अरुचि, मंदाग्नि, यकृत शोथ, यकृतवृ(, कामला, पाण्डु, शारीरिक दुर्बलता आदि में बहुत लाभकर है। यह पाचनक्रिया को सुधारकर शरीर को हृष्टपुष्ट बनाता है। यह पुरुष, स्त्री तथा बच्चों सभी को समान रूप से प्रयोज्य है।
पैकिंग- 450 मिली.कार्डवक्स पैकिंग , 225 मिली.।
2. उदर विकारासव –
घटक – 1 लिटर आसव में द्राक्षासव334 मिली., लोहासव 333 मिली., कुमारी आसव 333 मिली।
रोग निर्देश – यह अरुचि, मंदाग्नि, यकृत विकार, पाण्डु, कामला आदि पाचन संस्थान के रोगों के लिये श्रेष्ठ आसव है। यह आसव पाचक संस्थान को बल देकर पाचक रसों की वृ( करता है। जिससे रोगी को खूब भूख लगती है तथा खाया हुआ भोजन पच जाता है यह कब्ज को दूर कर मल क्रिया को सामान्य करता है।
पैकिंग- 450 मिली.कार्डवक्स पैकिंग, 225 मिली.।
3. प्रदर रोगासव –
घटक – 1 लिटर आसव में अशोकारिष्ट 600 मिली., लोध्रासव 200 मिली., पत्रंगासव 200 मिली।
मात्रा एवं प्रयोग विधि- 3-4 चम्मच तक बराबर जल मिलाकर भोजन के बाद।
रोग निर्देश – उपरोक्त तीन आसव अरिष्टों के मिश्रण से बना यह आसव श्वेत प्रदर, रक्तप्रदर, मासिक धर्म की अनियमितता, गर्भाशय की कमजोरी, कैल्शियम तथा रक्त की कमी को दूर करने वाला स्त्रियों को शक्ति, स्फूर्ति का संचार करता है।
पैकिंग- 450 मिली. कार्डबॉक्स पैकिंग, 225 मिली.।
4.रक्त शोधासव –
घटक – 1 लीटर आसव में – खदिरारिष्ट 600 मिली., पत्रंगासव 200 मिली., रक्तशोधिकारिष्ट ;रसतंत्रसारद्ध 200 मिली.।
मात्रा- 3-4 चम्मच तक बराबर जल मिलाकर भोजन के बाद।
रोग निर्देश- उपरोक्त तीनों आसव अरिष्ट से मिश्रित यह आसव विभिन्न रक्त विकारों यथा खाज, खुजली, एलर्जी, सोरायसिस, कुष्ठ, चकत्ते आदि में उपयोगी है। इसके सेवन से रक्त का शोधन होकर विभिन्न चर्म विकारों में स्थाई लाभ होता है।
पैकिंग- 450 मिली.कार्डवक्स पैकिंग, 225 मिली.।
5. श्वासकासासव –
घटक – 1 लीटर आसव में कनकासव 800 मिली., वासारिष्ट 200 मिली.।
मात्रा- 3-4 चम्मच बराबर जल मिलाकर भोजनोपरान्त।
रोग निर्देश – यह मिश्रित आसव श्वसन केन्द्र को उत्तेजित कर श्वासनलिकाओं को विस्फारित करता है तथा कफ को आसानी से बाहर निकालता है। यह विभिन्न एलर्जी कारण से उत्पन्न कफ को बनने से रोकता है जिससे श्वास वेग में स्थाई लाभ होता है। यह विभिन्न कारणों से उत्पन्न खांसी में लाभकर है।
पैकिंग- 450 मिली.कार्डवक्स पैकिंग 225 मिली.।
6. वात विकारासव-
घटक – 1 लिटर आसव में घटकों की मात्रा- दशमूलारिष्ट 300 मिली., अश्वगंधारिष्ट 300 मिली., महारास्नादि क्वाथ ;प्रवाहीद्ध 400 मिली.।
मात्रा एवं प्रयोग विधि – 3-4 चम्मच तक भोजनरोपरान्त बराबर जल मिलाकर।
रोग निर्देश- यह मिश्रित आसव विभिन्न प्रकार के वात विकारों यथा आमवात, संधिवात, ग्रहणी, उरुस्तम्भ, पक्षाघात में विशेष लाभकर है। यह वातनाड़ी संस्थान को शक्ति प्रदान कर विभिन्न वात विकारों में स्थाई लाभ करता है।
पैकिंग- 450 मिली. ;कार्डबॉक्स पैकिंग मेद्धं, 225 मिली. ;कार्ड बॉक्स पैकिंग मेंद्ध।
औषधि विवरण पत्रिका
गर्ग वनौषधि भण्डार

Additional information

NOS

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