Description
शिशु रक्षक तैल (Ramban Lal Tail)
Ramban Lal Tail
स्ंस ज्ंपस
घटक- 300 मिली. तैल में घटकों की मात्रा – घृत कुमारी 100 ग्राम, शालपर्णी 100 ग्राम, शतावर 100 ग्राम, दूध 300 ग्राम, तिल तैल 300 मिली, रतजनजोत 5 ग्राम।
निर्माण विधि – पहले तीन द्रव्यों का अष्टमांश क्वाथ कर उसमें द्रव डालकर पाक किया, बाद में तिल तैल डालकर तैल सिद्व किया तत्पश्चात में रतनजोत डालकर तैयार किया।
रोग निर्देश- बच्चों के अस्थिमार्दव ;सूखाद्ध, अस्थिक्षय, मांसक्षय, दुर्बलता आदि में बाह्य प्रयोगार्थ उपयोगी।
प्रयोग विधि – स्नान पूर्व बच्चे के सम्पूर्ण शरीर पर थोड़ा गर्म करके मालिश करानी चाहिये।
विशेष – अस्थिमार्दव ;सूखाद्ध रोग में गर्ग शिशुशोषान्तक कैपसूल, बालविट जन्म घुट्टी, तथा बालविट ड्राप्स का अन्तः प्रयोग भी करना चाहिये। पैकिंग – 50 मिली.।
औषधि विवरण पत्रिका
गर्ग वनौषधि भण्डार
घटक- 300 मिली. तैल में घटकों की मात्रा – घृत कुमारी 100 ग्राम, शालपर्णी 100 ग्राम, शतावर 100 ग्राम, दूध 300 ग्राम, तिल तैल 300 मिली, रतजनजोत 5 ग्राम।
निर्माण विधि – पहले तीन द्रव्यों का अष्टमांश क्वाथ कर उसमें द्रव डालकर पाक किया, बाद में तिल तैल डालकर तैल सिद्व किया तत्पश्चात में रतनजोत डालकर तैयार किया।
रोग निर्देश- बच्चों के अस्थिमार्दव ;सूखाद्ध, अस्थिक्षय, मांसक्षय, दुर्बलता आदि में बाह्य प्रयोगार्थ उपयोगी।
प्रयोग विधि – स्नान पूर्व बच्चे के सम्पूर्ण शरीर पर थोड़ा गर्म करके मालिश करानी चाहिये।
विशेष – अस्थिमार्दव ;सूखाद्ध रोग में गर्ग शिशुशोषान्तक कैपसूल, बालविट जन्म घुट्टी, तथा बालविट ड्राप्स का अन्तः प्रयोग भी करना चाहिये। पैकिंग – 50 मिली.।
औषधि विवरण पत्रिका
गर्ग वनौषधि भण्डार











































































































































































































































































































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